1. मंडोर का पहला प्रतिहार राजा कौन था?
भोगभट्ट
रज्जिल
ककक
दद्द
Note: रज्जिल मंडोर का पहला प्रतिहार राजा था। मंडोर राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित है। मंडोर को प्रतिहारों का उत्पत्ति स्थल माना जाता है।

2. मंडोर के प्रतिहार वंश से सम्बन्धित प्रारम्भिक शासक का नाम था -
नागभट्ट प्रथम
महेन्द्र पाल
रामभद्र
वत्सराज
Note: ➠नागभट्ट प्रतिहारों की राजधानी को मंडोर से मेड़ता लेकर गया था। ➠मेड़ता राजस्थान के नागौर जिले में स्थित है। ➠नागभट्ट का बड़ा बेटा तात सन्नयासी बन गया था तथा मंडोर के आश्रम में रहता था। ➠नागभट्ट का छोटा बेटा भोज मंडोर का राजा बना था तथा प्रतिहारों की राजधानी मेड़ता से वापस मंडोर लेकर गया था।

3. हम्मीर मदमर्दन नामक रचना किसके द्वारा रचित है ?
नयन चन्द्र सूरी
शारंगधर
जयसिंह सूरी
जोधराज
Note: हम्मीर मदमर्दन नामक रचना "जयसिंह सूरी" द्वारा रचित है।

4. मारवाड़ का कौनसा शासक स्वतंत्रता प्रेमी था जिसने मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की
राव उदयसिंह
राव चन्द्रसेन
महाराजा जसवंत सिंह - 1
महाराजा अजीत सिंह
Note: 1562 ई. में राव मालदेव की मृत्यु के बाद इनके ज्येष्ठ पुत्र को राज्य से निष्कासित कर दिया तथा उदयसिहं (मोटा राजा) को पाटौदी का जागीरदार बना दिया, 1562 ई. में ही विधिवत् तरीके से राव चन्द्रसेन का राज्याभिषेक किया गया। अकबर द्वारा चंद्रसेन को बन्दी बनाने तथा उनका राज्य हथियाने के लिए अनेकों प्रयास किए गए । परंतु राव चंद्रसेन ने अकबर की हर चाल को नाकामयाब कर दिया। जब लगभग पूरा हिंदुस्तान अकबर की अधीनता स्वीकार कर चुका था तब जोधपुर के शासक राव चंद्रसेन और मेवाड़ के महाराणा प्रताप जी ही ऐसे शासक थे जो अकबर से लोहा ले रहे थे।


5. कर्नल जेम्स टॉड ने 1829 ई. में प्रकाशित अपनी पुस्तक “एनल्स एंड एंटीक्विटीज़ ऑफ राजस्थान” में राजस्थान के लिए किस नाम का प्रयोग किया-
रायथान
राजपुताना
राजधान
मत्स्य
Note:

6. टोंक(Tonk) जिले के उणियारा कस्बे के पास स्थित 'नगर' नामक कस्बे का प्राचीन नाम था?
टाटा नगर
बिराट नगर
महिषासुर नगर
मालव नगर
Note: नगर सभ्यता जो नगर नामक पुरातात्विक स्थल टाेंक जिले में उणियारा कस्बे के पास स्थित है। इसे कर्कोट नगर भी कहा जाता है। इसका प्राचीन नाम ‘मालव नगर’ था।

7. राजस्थान के प्रथम एवं एकमात्र राजप्रमुख थे-
महाराजा भवानीसिंह
जयपुर महाराजा सवाई मानसिंह
उदयपूर महाराणा भीमसिंह
उदयपूर महाराणा भूपालसिंह
Note:

8. मेवाड़ से युद्ध तथा चित्तौड़ की संधि किसके शासनकाल की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है?
शाहजहां
औरंगजेब
अकबर
जहांगीर
Note: मेवाड़ से युद्ध तथा चित्तौड़ की संधि जहांगीर के शासनकाल की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। जहांगीर ने सर्वप्रथम मेवाड़ की ओर ध्यान दिया तथा 1605 ई. से लेकर 1613 ई. तक मेवाड़ के लिए कई अभियान महावत खां के नेतृत्व में भेजे गए। इनमें अंतिम अभियान शहजादा खुर्रम के नेतृत्व में भेजा गया था तथा इसके परिणामस्वरूप मेवाड़ के राणा अमर सिंह तथा मुगलों के बीच में संधि हो गई (1615 ई.)।


9. मीराबाई के गुरु कौन थे?
दादू
रैदास
रामानंद
सूरदास
Note: मीराबाई के गुरु रैदास (रविदास) थे। महान संत रविदास का जन्म सन 1398 में काशी (उत्तरप्रदेश) हुआ था। वे बचपन से समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने के प्रति अग्रसर रहे। रविदास जी की ख्याति से प्रभावित होकर सिकंदर लोदी ने इन्हें दिल्ली आने का निमंत्रण भेजा था। मध्ययुगीन भक्ति परम्परा में उनका विशिष्ट स्थान है। कबीर की तरह रैदास भी संत कोटि के प्रमुख कवियों में विशिष्ट स्थान रखते हैं। मीराबाई भी रविदास जी की शिष्या थीं। मीराबाई का जन्म सन 1498 ई. में हुआ। ये बचपन से ही कृष्णभक्ति में रुचि लेने लगी थीं। मीरा का विवाह मेवाड़ के सिसोदिया राज परिवार में हुआ। उदयपुर के महाराजा भोजराज इनके पति थे जो मेवाड़ के महाराणा सांगा के पत्र थे। विवाह के कुछ समय बाद ही उनके पति का देहांत हो गया। पति की मृत्यु के बाद वे कृष्ण भक्ति में रम गईं।

10. वीर कल्लाजी चित्तोड़ के कौनसे साके में वीरगति को प्राप्त हुए थे?
तीसरा साका
दूसरा साका
पहला साका
चौथा साका
Note: कल्ला जी राठौड़ (आश्विन शुक्ल 8, 1601 विक्रमी - 1624 विक्रमी) राजस्थान के एक राजपूत योद्धा थे, जिन्हें लोकदेवता माना जाता है। ये मेड़ता के राव जयमल के छोटे भाई आसासिंह के पुत्र थे। इन्होने मेवाड़ के लिये महाराणा प्रताप के साथ अकबर से युद्ध किया था। ये तीसरे साका युद्ध (विक्रम संवत 1624) में चित्तौड़गढ़ में अकबर से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गये थे।

11. राजस्थान की किस बावड़ी को बावड़ियों का सिरमौर कहा जाता है?
सीताराम जी की बावड़ी
चाँद बावड़ी
रानी जी की बावड़ी
तापी बावड़ी
Note: बूंदी स्थित रानी जी की बावड़ी को बावड़ियों का सिरमौर कहा जाता है। इसका निर्माण रानी नातावन जी ने 1699 ई. में करवाया था। इस बावड़ी ने मध्यकालीन काल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, इसी कारण इसे महत्वपूर्ण सामाजिक ढ़ांचों के रूप में गिना जाता है। यह सीढ़ीदार कुआँ 165 फीट गहरा है, जो राजपूतों के शासनकाल में एक उल्‍लेखनीय स्‍थापत्‍य शैली को प्रर्दशित करता है। इस कुएं का प्रवेश द्वार काफी संकीर्ण है और इसमें लगे हुए स्‍तंभों पर पत्‍थर के हाथी भी ऊपर बने हुए हैं। सीढ़ी से नीचे जाने पर कुंआ काफी बड़ा और व्‍यापक है। पूरा कुंआ काफी अच्‍छी तरीके से खूबसूरती से की गई खुदाई से एस आकार ब्रेकेट के साथ सजाया गया है।

12. जून, 1947 को कालीबाई अपने अध्यापक को मुक्त कराने के दौरान पुलिस की गोलियों द्वारा भून दी गई। यह वीर बाला किस जिले की थी?
बांसवाड़ा
डूंगरपुर
जैसलमेर
उदयपुर
Note: जिला डूंगरपुर, राजस्थान की पहचान अमर शहीद वीर बाला कालीबाई के नाम से की जाती है। आदिवासी समुदाय भील के सोमा भाई के घर में वीर काली बाई का जन्म जून 1935 में हुआ। मात्र 12 वर्ष की उम्र में इस क्रांतिकारी बाला ने 19 जून 1947 को जागीरदारों व अंग्रेजों के शोषण के विरूद्ध बहादुरी की एक जोरदार मिसाल कायम कर आदिवासी समाज में शिक्षा की अलख जगाई।


[Rajasthan Patwari exam paper 2016]
13. हम्मीर ने सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के किस विद्रोही सेनापति को रणथम्भौर दुर्ग में शरण दी थी?
मीर मुहम्मद शाह
अमीर खाँ
मीर अलाबन्दे खाँ
मीर जुबेर खाँ
Note: हम्मीर ने सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के मीर मुहम्मद शाह विद्रोही सेनापति को रणथम्भौर दुर्ग में शरण दी थी। सुल्तान अलाउद्दीन ने इन विद्रोहियों को सौंप देने की माँग राव हम्मीर से की, हम्मीर ने उसकी यह माँग ठुकरा दी। क्षत्रिय धर्म के सिद्धान्तों का पालन करते हुए राव हम्मीर ने, शरण में आए हुए सैनिकों को नहीं लौटाया। शरण में आए हुए की रक्षा करना अपना कर्त्तव्य समझा। इस बात पर अलाउद्दीन क्रोधित होकर रणथम्भौर पर युद्ध के लिए तैयार हुआ।

[Rajasthan Patwari exam paper 2016]
14. ‘ब्रोचगुर्जर’ नामक एक ताम्रपत्र के आधार पर राजपूतों को यू-ची जाति का वंशज मानते हुए इनका सम्बन्ध कुषाण जाति से किसने जोड़ा है?
डॉ. भण्डारकर
डॉ. कानूनगो
जार्ज थॉमस
कनिंघम
Note: ‘ब्रोचगुर्जर’ नामक एक ताम्रपत्र के आधार पर राजपूतों को यू-ची जाति का वंशज मानते हुए इनका सम्बन्ध कुषाण जाति से कनिंघम ने जोड़ा है।

15. निम्न में से किस क्षेत्र का उल्लेख ऋग्वेद, रामायण, चरक सहिंता, महाभारत, तथा वृहद सहिंता में मिलता है-
जांगल प्रदेश
मरू प्रदेश
शूरसेन
मतस्य प्रदेश
Note: मरू प्रदेश का उल्लेख ऋग्वेद, रामायण, चरक सहिंता, महाभारत, तथा वृहद सहिंता में मिलता है। मरू प्रदेश आर्यो का प्रारंभिक जनतंत्र था। जिसमें वर्तमान के बीकानेर,नागौर,चूरू, गंगानगर,जैसलमेर एवं बाड़मेर की कुछ भाग सम्मिलित थे। कालांतर में इस क्षेत्र में कुछ विस्तार के साथ कुरू, मद्र तथा जांगल नामक जनपदों का निर्माण हुआ।

16. हाड़ी रानी कर्मावती द्वारा जौहर में प्रवेश करते समय दिये गये भूमि अनुदान की जानकारी का स्त्रोत कौन सा है-
चौकली के ताम्रपत्र
रणकपुर प्रशस्ति
पुर के ताम्रपत्र
चीरवे का शिलालेख
Note: पुर के ताम्रपत्र (1535 ई.) से हाडी रानी कर्मावती द्वारा जौहर में प्रवेश करते समय दिये गये भूमि अनुदान की जानकारी मिलती है।


17. राजस्थान के ‘गांधी’ कहलाते हैं?
राव गोपाल सिंह
प्रताप सिंह बारहठ
जमना लाल बजाज
गोकुल भाई भट्ट
Note: हाथल गाँव (सिरोही) में जन्में “राजस्थान के गाँधी” गोकुल भाई भट्ट जी के रचनात्मक कार्यो में प्रमुख सहयोगी रहे। बम्बई में कांग्रेस को संगठित कर विदेशी वस्त्रों की होली जलाई और नमक सत्याग्रह और शराब बंदी सत्याग्रह का सफल सञ्चालन किया। 1939 ईस्वीं में सिरोही प्रजामण्डल की स्थापना कर निरंकुश शासन के विरुद्ध संघर्ष कर उत्तरदायी सरकार और नागरिक अधिकारों की स्थापना करवाई। आचार्य विनोबा भावे के भूदान आंदोलन , जयप्रकाश नारायण की समग्र क्रान्ति में सक्रीय योगदान दिया। दलितोद्धार , शिक्षा , खादी और चरखा संघ का प्रसार , मद्य निषेध के लिए आमरण अनशन किया। आबू का विलय अपने प्रयासों से राजस्थान में करवाया। पद्मभूषण और जमनालाल बजाज पुरस्कारों से सम्मानित गोकुल भाई भट्ट ने निश्चय ही “राजस्थान के गांधी” की उपाधि को सार्थक किया।

18. जयपुर शहर को 1876 में ब्रिटिश साम्राज्य के किस सदस्य के स्वागत में गुलाबी रंग से रंगवाया गया था?
प्रिंस चार्ल्स
प्रिंस अलबर्ट
महारानी विक्टोरिया
किंग एडवर्ड
Note: वर्ष 1876 में इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ और प्रिंस ऑफ वेल्स प्रिंस अलबर्ट जयपुर आने वाले थे। गुलाबी रंग मेहमानों के स्वागत को दर्शाता है, इसलिये जयपुर के महाराजा राम सिंह ने मेहमानों का स्वागत करने के लिए पूरे शहर को गुलाबी रंग से रंगवा दिया था।

19. प्राचीन काल में बीकानेर को किस नाम से जाना जाता था?
जांगल प्रदेश
ढूंढाड
मत्स्य प्रदेश
हाडोती
Note: राठौडों के प्रभुत्व में आने से पूर्व बीकानेर का क्षेत्र जांगल प्रदेश के नाम से जाना जाता था, जो मारवड़ के उत्तर में स्थित है। महाभारत काल में यह प्रदेश कुरू प्रदेश के अन्तर्गत आता था।

20. फारसी इतिहासकारों ने ‘हशमत वाला शासक’ किसे कहा था?
महाराणा कुंभा
महाराणा प्रताप
राव मालदेव
राव चंद्रसेन
Note: फारसी इतिहासकारों ने ‘हशमत वाला शासक’ महाराणा प्रताप को कहा था। महाराणा प्रताप उदयपुर, मेवाड़ में सिसोदिया राजपूत राजवंश के राजा थे। इनका नाम इतिहास में वीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है। इन्होनें कई वर्षों तक मुग़ल सम्राट अकबर के साथ संघर्ष किया था। महाराणा प्रताप ने मुगलों को कई बार युद्ध में भी हराया था।


21. मुगलों की जीवनपर्यन्त सेवा बीकानेर के किस शासक ने की थी?
महाराजा अनूपसिंह
महाराजा रायसिंह
महाराणा विनयसिंह
राव जैतसी
Note: मुगलों की जीवनपर्यन्त सेवा बीकानेर के शासक महाराजा रायसिंह ने की थी। महाराजा रायसिंह ने सुदृढ़ जूनागढ़ दुर्ग का निर्माण करवाया था। इन्होनें किले के अंदर एक प्रशस्ति लिखवाई जिसे अब रायसिंह प्रशस्ति के नाम से जाना जाता है। महाराजा रायसिह विद्यानुरागी व धार्मिक प्रवृत्ति का था। उसने ‘राय सिंह महोत्सव’ व ‘ज्योतिष रत्नमाला’ जैसे ग्रंथों की रचना की थी। ‘कर्मचन्द वंशौत्कीर्तिम् काव्यम्’ में महाराजा रायसिंह को ‘राजेन्द्र’ कहा गया है। रायसिंह की दानशीलता के कारण मुंशीदेवी प्रसाद ने उसे राजपूतानें के करण की संज्ञा दी थी।

22. किस शासक के शासन काल को चौहान शासनकाल का स्वर्णकाल कहा जाता है?
अजयराज
अणोंराज
पृथ्वीराज चौहान तृतीय
बीसलदेव चतुर्थ
Note: बीसलदेव चतुर्थ के शासन काल को चौहान शासनकाल का स्वर्णकाल कहा जाता है। बीसलदेव चतुर्थ महान कवि एवं लेखक था। उसने ‘हरिकेल’ जैसे नाटकों की रचना की थी। बीसलदेव ने चालुक्य नरेश कुमार पाल को परास्त किया था। इनकी राज्य की सीमा पंजाब, राजपूताना तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैली थी।

[RPSC RAS Pre-2018]
23. राजस्थान के पूर्व मध्यकालीन राज्यों में ‘नैमित्तिक’ पदनाम का प्रयोग किया जाता था?
मुख्य न्यायिक अधिकारी के लिए
लोक स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख के लिए
राजकीय कवि के लिए
राजकीय ज्योतिष के लिए
Note:

24. स्वतंत्रता सेनानी प्रताप सिंह बारहट की जन्मस्थली कहाँ है?
भीलवाड़ा
जयपुर
कोटा
अजमेर
Note: स्वतंत्रता सेनानी प्रताप सिंह बारहट का जन्म राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा के पास देवपुरा गांव में 24 मई, 1893 में हुआ था। वे क्रान्तिवीर ठा. केसरी सिंह बारहठ के पुत्र थे।


[RSMSSB LDC-2018]
25. किस समाचार-पत्र के माध्यम से विजयसिंह ने बिजौलिया किसान आन्दोलन को भारत में चर्चित बनाया?
यंग इन्डिया
मराठा
प्रताप
केसरी
Note: विजय सिंह पथिक ने कानपुर से प्रकाशित गणेशशंकर विद्यार्थी द्वारा सम्पादित पत्र "प्रताप" के माध्यम से बिजौलिया के किसान आन्दोलन को समूचे देश में चर्चा का विषय बना दिया। 1919 में अमृतसर कांग्रेस में पथिक जी के प्रयत्न से बाल गंगाधर तिलक ने बिजौलिया सम्बन्धी प्रस्ताव रखा।

[RSMSSB LDC-2018]
26. कर्नल जेम्स टॉड ने निम्न में से किस युद्ध को ‘मेवाड़ के इतिहास का मेरेथॉन’ कहा है?
कुम्भलगढ़ का युद्ध
गोगुन्दा का युद्ध
दिवेर का युद्ध
हल्दीघाटी का युद्ध
Note: कर्नल टाॅड ने जहां हल्दीघाटी को 'थर्मोपाली' कहा है वही दिवेर-छापली के युद्ध को 'मेराथन' की संज्ञा दी है। जिस प्रकार एथेन्स जैसी छोटी इकाई ने फारस की बलवती शक्ति को 'मेरॉथन' में पराजित किया था, उसी प्रकार मेवाड़ जैसे छोटे राज्य ने मुगल राज्य के वृहत सैन्यबल को दिवेर-छापली में परास्त किया।

[RSMSSB LDC-2018]
27. अजमेर शहर के संस्थापक कौन थे?
अजयपाल
अजयराज
पृथ्वीराज प्रथम
अर्णोराज
Note: 27 मार्च, 1112 को चौहान वंश के 23वें शासक राजा अजयराज चौहान ने गढ़ अजयमेरू की स्थापना की तथा चौहान साम्राज्य की राजधानी बनाई। उसके बाद इसका नाम अजयमेर और फिर अजमेर हुआ।

28. मीराबाई का जन्म किस वंश में हुआ-
चैहान
परमार
राठौड़
हंस सम्प्रदाय
Note: मीराबाई का जन्म राठौड़ वंश में हुआ था। मीराबाई का जन्म 1498 ई. में पाली के कुड़की गांव में दूदा जी के चौथे पुत्र रतन सिंह के घर हुआ।


29. राजस्थान में नाथ सम्प्रदाय का प्रमुख केन्द्र हैं-
जयपुर
बीकानेर
उदयपुर
जोधपुर
Note: राजस्थान ने नाथ सम्प्रदाय के प्रमुख केंद्र पुष्कर और जोधपुर में है। नाथ संप्रदाय उत्तर-पश्चिमी भारत का एक धार्मिक पंथ है। इसके आराध्य शिव हैं। यह हठ योग की साधना पद्धती पर आधारित पंथ है। इसके संस्थापक गोरखनाथ माने जाते हैं। गोरखनाथ ने इस सम्प्रदाय के बिखराव और इस सम्प्रदाय की योग विद्याओं का एकत्रीकरण किया।

30. अकबर ने "मिर्जा राजा" की उपाधि किस राजपूत राजा को प्रदान की थी?
टोडरमल
राजा भारमल
भगवन्तदास
राजा मानसिंह
Note: अकबर ने राजा मान सिंह को "मिर्जा राजा" की उपाधि प्रदान की थी। मान सिंह अकबर की सेना के प्रधान सेनापति थे।




GK Test Series

Rajasthan GK Test Series #42

Time: 2 min. & Total Questions: 10


Rajasthan GK Test Series #41

Time: 2 min. & Total Questions: 10


Rajasthan GK Test Series #40

Time: 2 min. & Total Questions: 10