1. राजस्थान के किस जिले की थेवा कला प्रसिद्ध हैं?
करौली
प्रतापगढ़
राजसमंद
सवाई माधोपुर
Note: थेवा की हस्तकला कला स्त्रियों के लिए सोने मीनाकारी और पारदर्शी कांच के मेल से निर्मित आभूषण के निर्माण से सम्बद्ध है। इसके गिने चुने शिल्पी-परिवार राजस्थान के केवल प्रतापगढ़ जिले में ही रहते हैं। थेवा-आभूषणों के निर्माण में विभिन्न रंगों के शीशों (कांच) को चांदी के महीन तारों से बने फ्रेम में डाल कर उस पर सोने की बारीक कलाकृतियां उकेरी जाती है, जिन्हें कुशल और दक्ष हाथ छोटे-छोटे औजारों की मदद से बनाते हैं। यह आभूषण-निर्माण कला अपनी मौलिकता और कलात्मकता के कारण विश्व की उन अल्प हस्तकलाओं में से एक है - जो अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार और विपणन के अभाव में जल्दी विलुप्त हो सकती हैं|

2. हवामहल के वास्तुकार थे-
मंडन
जैता
विद्याधर भट्टाचार्य
लालचंद उस्ताद
Note: 15 मीटर ऊंचाई वाले पांच मंजिला पिरामिडनुमा हवामहल के वास्तुकार लाल चंद उस्ताद थे। हवामहल का डिजाइन इस्लामिक मुगल वास्तुकला के साथ हिंदू राजपूत वास्तुकला कला का एक उत्कृष्ण मिश्रण को दर्शाता है। 5 मंजिला हवामहल में वर्ष के दिनों के बराबर 365 जाली (झरोखे) और 953 खिड़कियां हैं। हवामहल का निर्माण राजपूतों के शासनकाल में जयपुर में महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने कराया था। हवामहल बनाने का उद्देश्य गर्मियों के समय में ताजी और खुली हवा प्राप्त करना तथा गर्मी से राहत पाना था।

3. मीणा से दो अर्द्धवृत्तों में अत्यंत धीमी गति से बिना वाद्य के किया जाने वाला गरासियों का प्रसिद्ध नृत्य कौनसा है?
वालर नृत्य
लूर नृत्य
मांदल नृत्य
गैर नृत्य
Note: मीणा से दो अर्द्धवृत्तों में अत्यंत धीमी गति से बिना वाद्य के किया जाने वाला गरासियों का प्रसिद्ध "लूर नृत्य" है। लूर नृत्य मारवाड़ (राजस्थान) का लोक नृत्य है। यह नृत्य फाल्गुन मास में प्रारंभ होकर होली दहन तक चलता है। यह नृत्य राजस्थानी महिलाओं द्वारा किया जाता है।

4. वह कौनसी रम्मत है, जिसका आधार प्रति वर्ष घटित नवीन घटनाएँ होती है?
फक्कड़ दाता री रम्मत
सांग मेहरी री रम्मत
अमरसिंह राठौड़ री रम्मत
हेड़ाऊ मैरी री रम्मत
Note: सांग मेहरी रम्मत में हर वर्ष की ताजा घटनाओं को केंद्र में रखकर ख्याल रखा जाता है। स्वांग मेहरी अथवा सांग मेहरी की रम्मत भी बीकानेर की प्रमुख रम्मतों में से एक है। लगभग 135 वर्शों से बारह गुवाड़ चैक में इस रम्मत का मंचन किया जा रहा है। यह रम्मत फाल्गुन शुक्ला एकादशी की रात्रि को 1 बजे प्रारंभ होकर दूसरे दिन सुबह 10 बजकर 11 मिनट तक चलती है। इसके प्रारंभ होने से पूर्व एक परिक्रमा निकाली जाती है, इसे स्थानीय भाषा में ‘छींकी’ कहा जाता है।

5. नींबू, क्सूम्बो, रिडमल, मधकर, एक थमियी महल, कोछबियों राणों, बीजा सोरठ, आदि क्या है?
लोक नाट्य
लोक नृत्य
लोक गीत
वाद्य यंत्र
Note: नींबू, क्सूम्बो, रिडमल, मधकर, एक थमियी महल, कोछबियों राणों, बीजा सोरठ, आदि लोकगीत है।


6. ‘झल्ले आउबो’ गीत में किसका वर्णन किया गया है?
आउवा के युद्ध के पूर्व अंग्रेजों एवं आउवा के ठाकुर के मध्य हुए पत्र व्यवहार का
आउवा के ठाकुर कुशालसिंह के परिवार का
अंग्रेजों एवं आउवा के ठाकुर कुशालसिंह के बीच हुए युद्ध का
1857 की क्रांति का
Note: ‘झल्ले आउबो’ गीत में अंग्रेजों एवं आउवा के ठाकुर कुशालसिंह के बीच हुए युद्ध का वर्णन किया गया है।

7. ‘रोली वापरियों’ गीत में किसका वर्णन किया गया है?
1857 की क्रांति का
अंग्रेजों की ‘फूट डालो, राज करो, की नीति का
ड्रग-जी-जवार जी की वीरता का
लौटिया जाट एवं करणीया मीणा का
Note: ‘रोली वापरियों’ गीत में अंग्रेजों की ‘फूट डालो, राज करो, की नीति का वर्णन किया गया है।

8. अलवर का ‘रसखान’ किसे कहा जाता है?
नवाब वाजिद अली शाह
मोहम्मद शाह रंगीले
सम्मोखान सिंह
राव अलीबख्श
Note: अलवर का ‘रसखान’ राव अलीबख्श को कहा जाता है। इन्हें अलीबख्शी ख्यालों के जन्मदाता के रूप में जाना जाता है।

9. ‘सपेरा नृत्य’ किस जाति द्वारा किया जाता है?
भवाई
भोपा
सहरिया
कालबेलिया
Note: ‘सपेरा नृत्य’ कालबेलिया जाति द्वारा किया जाता है। यह जनजाति खासतौर पर इसी नृत्य के लिए जानी जाती है और यह उनकी संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। आनंद और उत्सव के सभी अवसरों पर इस जनजाति के सभी स्त्री और पुरुष इसे प्रस्तुत करते हैं।

10. ‘मोर नृत्य’ किस जाति की महिलाओं द्वारा किया जाता है?
नष्ट
भवाई
भोपा
लेगा
Note: ‘मोर नृत्य’ नष्ट जाति की महिलाओं द्वारा किया जाता है। इस नृत्य में पुरुष एवं महिला दोनों भाग लेते है। यह भरतपुर का प्रसिद्ध नृत्य है।


11. ‘बरगू’ क्या है?
सुषिर वाद्य
ताल वाद्य
तत वाद्य
घन वाद्य
Note: ‘बरगू’ सुषिर वाद्य है। हवा द्वारा बजने वाले यंत्र को सुषिर वाद्य यंत्र कहते है।

12. ‘उमराव’ क्या है?
एक प्रकार का वाद्य
गरासियों का निवास स्थान
तुर कलंगी लोक नाट्य का एक रूप
लोकगीत
Note: ‘उमराव’ गीदड़ खेलने के समय गाया जाने वाला एक लोकगीत है।

13. गवरी नृत्य में ‘पुरिया’ किसे कहा जाता है?
सूर्य
शिव
इंद्र
विष्णु
Note: गवरी नृत्य में ‘पुरिया’ शिव को कहा जाता है। गवरी नृत्य भील जाति के लोगों द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला एक प्रसिद्ध लोक नृत्य है। देवताओं को प्रसन्न करने के लिए गवरी नृत्य एक वृत्त बनाकर और समूह में किया जाता है। इस नृत्य के माध्यम से कथाएँ प्रस्तुत की जाती है। यह नृत्य ‘रक्षा बंधन’ के बाद से शुरू होता है। इस नृत्य में महिला का किरदार भी पुरुष उसकी वेशभूषा धारण कर निभाते हैं।

14. तेरहताली नृत्य का प्रमुख वाद्य यंत्र कौनसा है?
चांग
झांझ
मंजीरा
श्रीमंडलं
Note: तेरहताली नृत्य का प्रमुख वाद्य यंत्र मंजीरा है। तेरहताली नृत्य राजस्थान के प्रसिद्ध लोक नृत्यों में से एक है, जो बैठकर किया जाता है। यह नृत्य कमाड़ जाति के लोगों द्वारा किया जाता है। इस नृत्य में महिलाएं अपने हाथ, पैरों व शरीर के 13 स्थानों पर मंजीरे बाँध लेती है। तेरहताली नृत्य करने वाली महिलाएँ दोनों हाथों में बँधे मंजीरों को गीत की ताल व लय के साथ तेज गति से शरीर पर बँधे अन्य मंजीरों पर प्रहार करती हुईं विभिन्न भाव-भंगिमाएं प्रदर्शित करती हैं। इस नृत्य के समय पुरुष तंदूरे की तान पर रामदेव जी के भजन गाते है।

15. भवानी नाट्यशाला कहाँ पर स्थित है?
उदयपुर
जयपुर
जोधपुर
झालावाड़
Note: भवानी नाट्यशाला झालावाड़ में स्थित है। भावनी नाट्यशाला ओपेरा शैली पर आधारित रंगमंचीय व्यवस्थाओं एवं जटिल तकनीक के अनूठे संगम के लिए प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि संपूर्ण विश्व में ऐसे सिर्फ आठ नाट्यशालाएँ हैं। उस समय जब यह नाट्यशाला बहुत अधिक प्रसिद्ध थी, ‘शाकुंतलम’ और ‘शेक्सपियर’ जैसे नाटक यहाँ प्रदर्शित किये गए थे। इस नाट्यशाला का प्रयोग पारसी थियटर की तरह किया जाता है।


16. जहूर खां मेवाती, उमर फारुख मेवाती किसके वादक है?
सुरिन्दा
दुकाको
भपंग
तंदूरा
Note: जहूर खां मेवाती, उमर फारुख मेवाती भपंग के वादक है। भपंग वाद्य यंत्र डमरू की आकृति से मिलता जुलता है। यह वाद्य यंत्र तुबे से बनता है। यह यंत्र राजस्थान के अलवर जिले का लोकप्रिय वाद्य यंत्र है। अलवर जिले के जोगी जाति के लोग भपंग वाद्य यंत्र के साथ राजा भर्तृहरि, भक्त पूरणमल व हीर रांझा इत्यादि की लोक गाथाएं गाते है।

17. कामड़ जाति के लोग कौनसा यंत्र बजाते है?
तंदूरा
सुरिन्दा
गूजरी
दुकाको
Note: तंदूरा धातु और हल्की लकड़ी से निर्मित एक तार वाद्य यंत्र है। यह राजस्थान में पाया जाने वाला ड्रोन वाद्य यंत्र है। यह मुख्य रूप से राजस्थान के भक्ति और पारंपरिक गायन में उपयोग किया जाता है। कामड़ और नाथ सम्प्रदाय के व्यक्ति इस वाद्य को बजाते हैं। अधोर पंथी, आदिनाथ, बीसनामी, कुंडापंथी, दसनामी आदि व्यक्ति इसे बजाते हैं। तेरहताली नृत्य में भी इस वाद्य को बजाया जाता है।

18. सुषिर वाद्यों में सर्वश्रेष्ठ, सुरीला एवं मांगलिक वाद्य यंत्र कौनसा है?
बांसुरी
अलगोजा
पूगी
शहनाई
Note: शहनाई को सुरीला व मांगलिक वाद्य यंत्र माना जाता है। शहनाई का निर्माण शिशम की लकड़ी या सांगवान की लकड़ी से किया जाता है। शहनाई की आकृति चिलम जैसी होती है। शहनाई में कुल 8 छेद होते है। शहनाई का प्रमुख वादक बिस्मिल्लाह खां है।

19. कौनसा वाद्य यंत्र अलगोजा, शहनाई तथा बांसुरी का मिश्रण होता है?
नफीरी
सतारा
मशक
तारपी
Note: सतारा वाद्य यंत्र अलगोजा, बांसुरी व शहनाई का मिश्रण माना जाता है। इसमें दो बांसुरियों को एक साथ फूंक द्वारा बजाया जाता है। एक बांसुरी केवल श्रुति के लिए तथा दूसरी को स्वरात्मक रचना के लिए काम में लिया जाता है। इसे ऊब सूख लकड़ी में छेद करके बनाया जाता है। दोनों बांसुरियों एक सी लंबाई होने पर पाबा जोड़ी, एक लंबी और एक छोटी होने पर डोढ़ा जोङा एवं अलगोजा नाम से भी जाना जाता है। सतारा वाद्य यंत्र का प्रयोग बाड़मेर तथा जैसलमेर की जनजातियों तथा लंगा जाति के द्वारा किया जाता है।

20. करणा भील किस वाद्य यंत्र के प्रसिद्ध वादक है?
नड़
मशक
मोरचग
सतारा
Note: करणा भील नड़ वाद्य यंत्र के प्रसिद्ध वादक है। इसमें 4 छेद होते है तथा इसे मुंह के किनारे से बजाया जाता है। नड़ वाद्य यंत्र बैंत व कंगोर की लकड़ी से निर्मित होता है। नड़ वाद्य यंत्र का सर्वाधिक प्रयोग जैसलमेर जिले में किया जाता है। नड़ वाद्य यंत्र सिंधी संस्कृति का पूर्ण प्रभाव माना जाता है। नड़ वाद्य यंत्र को भैरव का गुणगान करते समय राजस्थान के भोपे बजाते है।

21. राजस्थान का राज्य गीत कौन-सा हैं ?
प्रियतम प्रदेश आया
मोरया आछो बोल्यो रे
इण लहेरिये रा
केसरिया बालम
Note: राजस्थान का राज्य गीत "केसरिया बलमा पधारो म्हारे देश" है। अल्लाह जिलाई बाई ने पहली बार बीकानेर के महाराजा गंगासिंह के दरबार में केसरिया बालम गीत को गाया था।

22. प्रदेश में सुखद वर्षा की कामना के लिए जयपुर में कौनसा कार्यक्रम आयोजित किया जाता है?
राजस्थान उत्सव
रंग मल्हार
मृगनयनी
फागोत्सव
Note: प्रदेश में सुखद वर्षा की कामना के लिए राजस्थान के चित्रकारों द्वारा ‘रंग मल्हार’ समारोह का आयोजन किया जाता है। खास बात यह है कि इसमें कलाकार हर साल अलग-अलग माध्यमों पर चित्रकारी करके ‘सेव द एन्वायर्नमेंट’ के मैसेज के साथ प्रदेश में अच्छी वर्षा की कामना करते हैं।

23. "अडॉप्ट ए हेरिटेज" योजना के तहत् राजस्थान के किस एकमात्र स्मारक को गोद लिया गया है?
आभानेरी
भानगढ़
मण्डोर फोर्ट
हर्षद माता मंदिर
Note: मण्डोर फोर्ट को "अडॉप्ट ए हेरिटेज" योजना के तहत् मेहरानगढ़ ट्रस्ट के द्वारा गोद लिया गया है। इस योजना के तहत् किसी भी व्यक्ति विशेष या संस्थान के द्वारा किसी प्राकृतिक धरोहर या स्थापत्य कला के सरंक्षण के लिए उसे गोद लिया जा सकता है।

24. जलदुर्ग गागरोन किन नदियों के संगम पर स्थित है?
कालीसिंध-पार्वती
कालीसिंध-परवन
कालीसिंध-चम्बल
कालीसिंध-आहू
Note: जलदुर्ग गागरोन कालीसिंध एवं आहू नदी के संगम पर स्थित है। गागरोन दुर्ग हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। यहाँ सूफ़ी संत मीठे शाह की दरगाह भी है। इस दुर्ग की नींव सातवीं सदी में रखी गई थी और चौदहवीं सदी तक इसका निर्माण पूर्ण हुआ था। यह दुर्ग राजस्थान के झालावाड़ में स्थित है।

25. दोहरे परकोटे वाले मिट्टी से बने किस दुर्ग को अंग्रेज भी नही जीत पाए थे?
जैसलमेर का दुर्ग
भरतपुर का दुर्ग
बीकानेर का दुर्ग
सूरतगढ़
Note: दोहरे परकोटे वाले मिट्टी से बने भरतपुर के दुर्ग को अंग्रेज भी नही जीत पाए थे। इस दुर्ग का निर्माण भरतपुर के जाट वंश के कुंवर महाराजा सूरजमल ने 19 फरवरी, 1733 ई. में करवाया था। यह भारत का एकमात्र अजेय दुर्ग है। इस दुर्ग को अजयगढ़ का दुर्ग भी कहा जाता है। इसके चारों ओर मिट्टी की दोहरी प्राचीर बनी है, अत: इसको मिट्टी का दुर्ग भी कहते है। इस दुर्ग के दो दरवाजे है।

26. ‘आईलैण्ड पैलेस’ के नाम से किसे जाना जाता है?
जंतर मंतर
जल महल
पन्ना मीणा की बावड़ी
हवामहल
Note: ‘आईलैण्ड पैलेस’ के नाम से जल को महल को जाना जाता है। जल महल जयपुर के मानसागर झील के मध्य स्थित प्रसिद्ध ऐतिहासिक महल है। अरावली पहाडिय़ों के गर्भ में स्थित यह महल झील के बीचों बीच होने के कारण ‘आई बॉल’ भी कहा जाता है। इसे ‘रोमांटिक महल’ के नाम से भी जाना जाता था। जयसिंह द्वारा निर्मित यह महल मध्‍यकालीन महलों की तरह मेहराबों, बुर्जो, छतरियों एवं सीढीदार जीनों से युक्‍त दुमंजिला और वर्गाकार रूप में निर्मित भवन है। जल महल का निर्माण 1899 ई. में हुआ था।

27. तिमणिया पहना जाता है-
महिलाओं द्वारा, गले में
महिलाओं द्वारा, कमर में
पुरूषों द्वारा, बाजू पर
पुरूषों द्वारा, कान में
Note: तिमणिया, राजस्थानी महिलाऐं गले में पहनती है।

28. ‘तेधड़’ आभूषण पहना जाता है-
पुरूषों के कानों में
स्त्रियों के पैरों में
स्त्रियों के सिर पर
स्त्रियों के हाथों में
Note: ‘तेधड़’ आभूषण स्त्रियों के पैरों में पहना जाता है।

29. ‘ताराभांत की ओढ़नी’ राजस्थान की किन स्त्रियों की लोकप्रिय वेशभूषा है-
आदिवासी
गुर्जर
ब्राह्मण
बिशनोई
Note: "तारा भांत की ओढ़नी" आदिवासी स्त्रियों की लोकप्रिय ओढ़नी है। इसमें जमीन भूरी-लाल तथा किनारों का छोर काला षट्कोणीय आकृति वाला तारों जैसा होता है।

30. महिलाओं के गहनों का सिर से पैर तक का सही क्रम है-
बोर, चूंप, नथ, टिडी, कड़ला, भलको, बिन्दिया, गलपटियों
बोर, नथ, बिन्दिया, टिडी, भलको, चूंप, गलपटियो, कड़ला
बोर, टीडी, भलको, बिन्दिया, नथ, चूंप, गलपटियों, कड़ला
बोर,बिन्दिया, टीडी, भलको, गलपटियों, चुंप, कड़ला, नथ
Note:


31. ‘चोप’ नामक आभूषण पहना जाता है-
कलाई में
गर्दन में
दांत में
नाक में
Note: ‘चोप’ नामक आभूषण नाक में पहना जाता है।

32. गले में बाँधी जाने वाली देवी देवताओं की प्रतिमा को कहते हैं-
अरसी
तकमा
नावा
मूरत
Note: नावा व चौकी गले में बाँधी जाने वाली देवी देवताओं की प्रतिमा को कहते हैं।

33. निम्न में से महिलाए पैर में क्या पहनती है?
खांच, अड़कनी, डोडी, बहरखौ
चोप, चुनी, लटकन, खींवनी
कंदोरो, जंजीर, तागड़ी, वसन
आंवला, कड़ला, लंगर, छड
Note: लंगर, छड, नेवरी, बिन्छुड़ी, आंवला तथा कड़ला पैर में पहने के आभूषण है।

34. निम्न में से 'मेख' है?
स्त्री-पुरुष के दांत में जड़ी सोने की चूंप
आभूषण में लटकाई जाने वाली छोटी लड़ी
पांवो में पहने जाने वाला एक आभूषण
अंगुली में पहने जाने वाला आभूषण
Note: मेख दांत के आभूषण चुंप का ही एक प्रकार है जिसे स्त्री-पुरुष दांत में लगते है।

35. हालरो, झालरो, खिंवली व तांतणियौ किस अंग से संबंधित है?
गला
सिर
कमर
बाजू
Note: हालरो, झालरो, खिंवली, तांतणियौ, पंचलड़ी, हंसुली, हाली व तिणणिया आदि स्त्रियाँ गले में धारण करती है।

36. निम्नांकित में से पुरुषों द्वारा पहने जाने वाला आभूषण है-
मुरकिया
बोरला
बंगड़ी
टड्डा
Note: मुरकिया एक प्रकार की बाली होती है जो पुरुष कान में पहनते हैं।

37. सटका शरीर के किस अंग का आभूषण है?
पैर
नाक
गला
कमर
Note: सटका नमक आभूषण स्त्रियाँ कमर पर धारण करती है।

38. 'कोकरूं, डरगनियो, तड़कली' आदि आभूषण किस अंग में पहने जाते है?
सिर
गला
नाक
कान
Note: टोटी, टोरियो, डरगनियो, तड़कली, पीपलपत्र, पासो, पीपलपान, बाली, लटकन, माकड़ी, सन्दोल, वेडलो तथा बूसली कुछ अन्य प्रमुख कान के आभूषण है।

39. 'टोडर' आभूषण है?
पुरुषों की पगड़ी का आभूषण
महिलाओं की कमर का आभूषण
महिलाओं के गले का आभूषण
पुरुषों के पैर का आभूषण
Note: पुरूषों के पांव में पहने जाने वाले आभूषण- टोडर, छेलकड़ा, बेड़ी-पागड़ौ आदि।

40. 'बंगड़ी' आभूषण ______ में पहना जाता है?
कमर
गला
बाजु
हाथ
Note: 'बंगड़ी' आभूषण हाथ में पहना जाता है।

41. 'खांच' कहाँ पहना जाता है?
बाँह
पाँव
कमर
कान
Note: 'खांच' आभूषण बाँह में पहना जाता है।

42. राजस्थान के कितने किले विश्व धरोहर में शामिल है?
9
8
6
3
Note: राजस्थान के छह किले आमेर, जैसलमेर, गागरोन, चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़ और रणथंभौर विश्व धरोहर में शामिल है।

43. भारत का एकमात्र विभीषण जी का मंदिर कहाँ स्थित हैं।
कोटा
पीपाड़ सिटी
मण्डोर
सीकर
Note: कोटा, राजस्थान से 16 किमी दूर कैथून कस्बे में भारत का एकमात्र विभीषण जी का मंदिर स्थित हैं।

44. राजस्थानी भाषा का सबसे प्राचीनतम ग्रंथ कौनसा माना जाता है?
हम्मीर महाकाव्य
भरतेश्वर बाहुबली घोर
प्रबन्ध चिन्तामणि
कान्हड़दे प्रबन्ध
Note: "भरतेश्वर बाहुबली घोर" ग्रंथ राजस्थानी भाषा का सबसे प्राचीन ग्रंथ है, इसके रचयिता ब्रजसेन सूरि है।

45. चुंप व रखन संबंधित है-
नाक
हाथ
दांत
कान
Note: राजस्थान में दांत के मुख्यतः 2 आभूषण देखने को मिलते है- 1. चुंप, 2. रखन। ये सोने व चाँदी की परते है जो दांत के ऊपर पहनी जाती है।

46. राजस्थान के किस जिले में मालव गणराज्य के 2000 साल पुराने औद्योगिक क्षेत्र के अवशेष मिले है?
बूंदी
प्रतापगढ़
टोंक
कोटा
Note: टोंक में मालव गणराज्य के अवशेष मिले हैं जो 2000 हजार साल पुराने लगते हैं। यहां पर आयरन फ्लेक, लोहे के पिघले टुकड़े, कई प्रकार के आयरन पीस मिले हैं, इनसे ऐसा प्रतीत होता है कि यहां पर औद्योगिक क्षेत्र रहा होगा।

47. राजस्थान के भीलों के लिए गोविंद गिरी जी द्वारा गठित सामाजिक-धार्मिक संगठन कौन-सा है?
आत्मीय सोसाइटी
ग्राम सभा
ब्रह्म समाज
संप सभा
Note: 1883 में गोविंद गिरी जी ने “संप सभा” की स्थापना की तथा मेवाड़, डूंगरपुर, गुजरात, मालवा, आदि क्षेत्रों के भील एवं गरासियों को संगठित करने का प्रयास किया। संप सभा का अर्थ आपसी एकता, भाईचारा और प्रेम भाव रखने वाला संगठन होता है।

48. होलार राजस्थानी लोक गीत किस अवसर पर गाए जाते हैं?
किसी को विवाह के लिए प्रस्ताव देने
शिशु का जन्म होने
गंगौर उत्सवों
विवाह के समापन
Note: होलार राजस्थानी लोक गीत शिशु का जन्म होने के अवसर पर गाए जाते हैं।

49. श्री रंगनाथ जी का मन्दिर राजस्थान के किस जिले में स्थित हैं?
कोटा
झालावाड़
अजमेर
राजसमन्द
Note: श्री रंगनाथ जी का मन्दिर राजस्थान के राजसमन्द जिले में स्थित हैं।

50. श्रीमती फलकू बाई, राजस्थान मे किस नृत्य की प्रसिद्ध नत्यांगाना हैं?
चरी नृत्य
घूमर नृत्य
इण्डोणी नृत्य
ड़ाडिया नृत्य
Note: फलकू बाई चरी नृत्य की प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं। चरी नृत्य राजस्थान में कई बड़े समारोहों, त्योहारों, लडके के जन्म पर, शादी के अवसरों के समय किया जाता है।

51. जमीन का जेवर किस दुर्ग को कहा गया है?
आमेर का किला
जूनागढ़ दुर्ग
तारागढ़
मेहरानगढ़ दुर्ग
Note: बीकानेर के जूनागढ़ दुर्ग को जमीन का जेवर भी कहा जाता है।

52. राजस्थान में कौनसा स्थान 'ब्ल्यू पॉटरी' के लिये जाना जाता है?
अलवर
जयपुर
जैसलमेर
जोधपुर
Note: "ब्लू पॉटरी" सांगानेर, जयपुर की प्रसिद्ध है। इस में परम्परागत हरे एवं नीले रंग का प्रयोग होता है। यह अकबर के समय ईरान से लाहौर आयी, इसके बाद राम सिंह प्रथम लाहौर से इसे जयपुर लाये। सर्वाधिक विकास इस कला का राम सिह द्वितीय के समय हुआ।

53. अयोध्या के राम मंदिर में स्थापित होने वाली साढ़े बारह फुट ऊँची कांस्य की महाराणा प्रताप की मूर्ति जयपुर के किस मूर्तिकार ने तैयार की है?
महावीर भारती
चंद्रकांत सोमपुरा
पारस मूर्ति
भारत कुल्हरी
Note: जयपुर के मूर्तिकार महावीर भारती व निर्मला कुल्हरी द्वारा साढ़े बारह फिट ऊंची महाराणा प्रताप की कांस्य प्रतिमा तैयार की गई है।

[REET-2016 ]
54. आभानेरी तथा राजौरगढ़ के कलात्मक वैभव किस काल के हैं?
राठौड
चौहान
गुहिल-सिसोदिया
गुर्जर-प्रतिहार
Note: आभानेरी तथा राजौरगढ़ के कलात्मक वैभव गुर्जर-प्रतिहार काल के है। गुर्जर-प्रतिहार राजवंश भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीन एवं मध्यकालीन दौर के संक्रमण काल में साम्राज्य स्थापित करने वाला एक राजपूत राजवंश था, जिसके शासकों ने मध्य-उत्तर भारत के बड़े हिस्से पर मध्य-8वीं से 11वीं सदी के बीच शासन किया।

[REET-2016]
55. राजस्थान के किस जिले में 'युद्ध संग्रहालय' की स्थापना अगस्त, 2015 में की गई?
जैसलमेर
जोधपुर
सीकर
बाड़मेर
Note: जैसलमेर के सैन्य स्टेशन में स्थापित 'जैसलमेर युद्ध संग्रहालय', राजस्थान का 24 अगस्त 2015 को उद्घाटन किया गया।

[RAS/RTS Pre. 2018]
56. किस स्थल से शासक मिनेण्डर के सोलह सिक्के प्राप्त हुए हैं?
वैराट
रैढ़
नगरी
नगर
Note: राजस्थान के जयपुर में स्थित वैराट से मिनेण्डर के 16 सिक्के प्राप्त हुए हैं। प्राचीन काल का विराटनगर ही आज वैराट के नाम से जाना जाता है। रैढ़ से मिनेण्डर के काल का एक अभिलेख प्राप्त हुआ हैं इंडो-यूनानी शासकों में मिनेण्डर का नाम सर्वाधिक प्रसिद्ध है।

[RAS/RTS Pre. 1997]
57. 84 खंभों की छतरी कहां पर है?
जयपुर
बूंदी
झालावाड़
कोटा
Note: बूंदी के तारागढ़ किले में 84 खंभों की छतरी, चित्रमहल आदि प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं। राजा रामदेव ने बूंदी की स्थापना की थी।

58. बूंदी दुर्ग में बने महलों के बारे में किसने लिखा है कि 'यह महल भूतों प्रेतों द्वारा निर्मित है'-
अबुल फजल
कर्नल टॉड
किपलिंग
फर्ग्युसन
Note:

59. मेहरानगढ़ दुर्ग में किस की मजार स्थित है?
भूरे खां की
अब्दुल्ला खां की
दीवान शाह की
मीरान खां की
Note: मेहरानगढ़ दुर्ग में भूरे खां की मजार स्थित है। भूरे खां 1808 में मेहरानगढ़ किले की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे। उनके मजार पर लोग मन्नत मांगने भी आते हैं। जोधपुर का मेहरानगढ़ किला 120 मीटर ऊंची एक पहाड़ी पर बना हुआ है। इस तरह से यह किला दिल्ली के कुतुब मीनार की ऊंचाई (73 मीटर) से भी ऊंचा है। वही मेहरानगढ़ दुर्ग के अंदर चामुंडा माता मंदिर तथा राठौड़ों की कुलदेवी नागणेची माता का मंदिर भी स्थित है।

60. मेवाड़ की आंख किसे कहा जाता है?
अचलगढ़ दुर्ग
कुम्भलगढ़ दुर्ग
चित्तौड़गढ़ दुर्ग
सज्जनगढ़ दुर्ग
Note: कुम्भलगढ किले को मेवाड की आँख कहते है। यह दुर्ग कई घाटियों व पहाड़ियों को मिला कर बनाया गया है, जिससे यह प्राकृतिक सुरक्षात्मक आधार पाकर अजय रहा। इस दुर्ग में ऊँचे स्थानों पर महल, मंदिर व आवासीय इमारते बनायीं गई और समतल भूमि का उपयोग कृषि कार्य के लिए किया गया।


61. वह किला जिसमें एक जैसे नौ महल है?
जूनागढ़ किला
जोधपुर किला
आमेर किला
नाहरगढ़ किला
Note:

62. बादल महल किस दुर्ग में स्थित है?
नाहरगढ़ दुर्ग
जालौर दुर्ग
चित्तौड़गढ़ दुर्ग
कुम्भलगढ़ दुर्ग
Note:

63. निम्न में से किस दुर्ग को यूनेस्को ने विरासत दुर्ग घोषित नहीं किया है?
जैसलमेर
आमेर
गागरोन
मांडलगढ़
Note: मांडलगढ़ को यूनेस्को ने विरासत दुर्ग घोषित नहीं किया है। राजस्थान के छह किले आमेर, जैसलमेर, गागरोन, चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़ और रणथंभौर विश्व धरोहर में शामिल है।

64. 'गुब्बारा', 'नुसरत', 'नागपली' और 'गजक' नाम है-
जोधपुर दुर्ग की तोपो के नाम
मेवाड़ में प्रचलित क्षेत्रीय मिठाइयों के नाम
मेवाड़ में प्रचलित राजस्व वसूली करो के नाम
मारवाड़ी ठिकानों के वस्त्रों के नाम
Note: मेहरानगढ़ दुर्ग में लंबी दूरी तक मार करने वाली तीन विशालकाय उत्कृष्ट तोपे – किलकिला तोप, शंभू बाण तोप, गजनी खा तोप आदि है। नागपली,नुसरत गजक, गुब्बारा आदि यहां के अन्य प्रसिद्ध तोपे है।

65. 'घुंघट' 'गूगड़ी' 'बांद्रा' और 'इमली' क्या है?
राजस्थानी खानपान विधियों के नाम
मारवाड़ी लोक परंपरा में जातियों के गोत्रों के नाम
मेवाड़ आंचलित में स्त्रियों के पहनावे के नाम
तारागढ़ अजमेर की प्राचीर की विशाल बुर्जो के नाम
Note:

66. वह किला जिसकी आजादी और अस्मिता की रक्षा के लिए वहां के ठाकुरों ने गोला और बारूद खत्म होने पर चांदी के गोले दागे थे-
चूरू का किला
जूनागढ़ का किला
लोहागढ़ का किला
केसरोली का किला
Note: "चूरू का किला" राजस्थान के चूरू जिले में स्थित है। इसका निर्माण वर्ष 1694 में ठाकुर कुशल सिंह ने करवाया था। यह किला दुनिया का एकमात्र ऐसा किला है, जहां युद्ध के समय गोला बारूद खत्म हो जाने पर तोप से दुश्मनों पर चांदी के गोले दागे गए थे। यह युद्ध 1814 में चूरू के राजा शिवजी सिंह और बीकानेर के रियासत के राजा सूरत सिंह के मध्य हुआ था।

67. निम्न में से कौन सा धान्वन दुर्ग है?
जैसलमेर दुर्ग
गागरोन दुर्ग
आमेर दुर्ग
अचलगढ़ दुर्ग
Note: धान्वन दुर्ग : ऐसा दुर्ग जिसके दूर-दूर तक मरु भूमि फैली हो, जैसे - जैसलमेर (स्थल दुर्ग) का किला ।

68. चित्तौड़गढ़ दुर्ग के विजय स्तंभ का वास्तुकार कौन था?
दीपा
जैता
जीवा
मंडन
Note: विजय स्तंभ के वास्तुकार मंडन, जैता व उसके पुत्र नापा, पुंजा थे। यह राजस्थान पुलिस और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का प्रतीक चिह्न है। इसे भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोश और हिन्दू देवी देवताओं का अजायबघर कहते हैं।

69. किस पहाड़ी पर जोधपुर का मेहरानगढ़ दुर्ग स्थित है?
बिथली टूंक
बड़ी टेकरी
चिड़िया टूंक
गिरी सुमेर
Note: मंडोर के किले को शत्रुओं से असुरक्षित जानकर राव जोधा ने मण्डोर से 6 मील दूर दक्षिण में चिडि़यानाथ की टूंक नामक पहाड़ी पर 12 मई 1459 से एक नया दुर्ग बनवाना शुरू किया। इसके बाद से 500 वर्ष तक ये किला मारवाड़ की राजनीतिक व सामरिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा।

70. बीकानेर के जूनागढ़ किले का निर्माण किसने करवाया था?
महाराजा अनूप सिंह
राव कल्याणमल
महाराजा रायसिंह
राव बीका
Note: बीकानेर के जूनागढ़ किले का निर्माण बीकानेर के शासक राजा राय सिंह ने प्रधान मंत्री करण चंद की निगरानी में करवाया था, राजा राय सिंह ने 1571 से 1611 AD के बीच बीकानेर पर शासन किया था। किले की दीवारों और खाई का निर्माणकार्य 1589 में शुरू हुआ था और 1594 में पूरा हुआ था। इस किले को जमीन का जेवर भी कहते है।

71. झालीबाब बावड़ी और मामादेव का कुंड निम्न में से किस दुर्ग में स्थित है-
कुम्भलगढ़ दुर्ग
गागरोन दुर्ग
चित्तौड़गढ़ दुर्ग
तारागढ़ दुर्ग
Note: झालीबाब बावड़ी और मामादेव का कुंड "कुम्भलगढ़ दुर्ग" में स्थित है।

72. गढ़ बिठली नाम से कौन सा दुर्ग प्रसिद्ध है-
चित्तौड़गढ़
तारागढ़
कुंभलगढ़
कटारगढ़
Note: अजमेर का तारागढ़ दुर्ग ही गढ़बीठली के नाम से जाना जाता है। राजा अजयपाल ने सातवीं शती में इस दुर्ग का निर्माण कराया था, इसलिए इसे अजयमेरु दुर्ग भी कहा जाता है।

73. राजस्थान का कौनसा किला सुवर्ण गिरी दुर्ग के नाम से प्रसिद्ध है?
जैसलमेर का किला
जालौर का किला
बूंदी का किला
सिवाना का किला
Note: जालौर का किला सुवर्ण गिरी दुर्ग के नाम से प्रसिद्ध है। यह दुर्ग सुवर्ण गिरी पहाड़ी पर स्थित हैं। डॉ दशरथ शर्मा के अनुसार प्रतिहार नरेश नागभटट् प्रथम ने इस दुर्ग का निर्माण करवाया था। वीर कान्हड देव सोनगरा और उसके पुत्र वीरम देव अलाउद्दीन खिलजी के साथ जालौर दुर्ग में युध्द करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए तथा 1311-1312 ई. के लगभग खिलजी ने जालौर पर अधिकार किया।

74. निम्न में से जयबाण नाम है-
एक पुस्तक का
एक तोप का
एक स्थान का
एक किले का
Note: जयबाण जयगढ़ किले के डूंगर दरवाजे पर रखी एक तोप है। जयबाण तोप एशिया की सबसे बड़ी तोप है। तोप की नली से लेकर अंतिम छोर की लंबाई 31 फीट 3 इंच है। जब जयबाण तोप को पहली बार टेस्ट-फायरिंग के लिए चलाया गया था तो जयपुर से करीब 35 किमी दूर स्थित चाकसू नामक कस्बे में गोला गिरने से एक तालाब बन गया था। इस तोप का वजन 50 टन है।

75. 99 बुर्जो वाला दुर्ग कहाँ स्थित है?
हनुमानगढ़
बाड़मेर
जैसलमेर
चित्तौरगढ़
Note: जैसलमेर का पीले पत्थर से बना ‘स्वर्ण किला’ राजस्थान के उत्तरी पश्चिमी भाग में प्रवेश का प्रमुख द्वार माना जाता रहा है। 75 मीटर ऊंची त्रिकूट पहाड़ी पर 99 बुर्जो वाला यह किला राजस्थान का अत्यंत प्रसिद्ध किला है।

76. महाराणा कुम्भा ने कितने दुर्गों का निर्माण करवाया?
29
31
32
33
Note: महाराणा कुंभा ने मेवाड़ के 84 दुर्गों में से 32 दुर्गों का निर्माण करवाया था।

77. दुर्ग जो महाराणा कुम्भा द्वारा निर्मित नहीं है?
बसंती दुर्ग
भैंसरोड़ गढ़ दुर्ग
मचान दुर्ग
भोमट दुर्ग
Note: भैंसरोडगढ़ दुर्ग के निर्माण का श्रेय सलम्बर के रावत केसरी सिंह के पुत्र रावत लाल सिंह-द्वितीय को जाता है। भैंसरोडगढ़ दुर्ग को “राजस्थान का वेल्लोर” कहते है। यह रावतभाटा के निकट स्थित है।

[RAS/RTS Pre. 2008]
78. निम्न में से किसे जल दुर्ग के रूप में जाना जाता है?
गागरोन दुर्ग
जैसलमेर दुर्ग
दौसा दुर्ग
नागौर दुर्ग
Note: झालावाड़ के गागरोन किले को जल दुर्ग के रूप में जाना जाता है। गागरोन 7वीं-8वीं सदी का प्राचीन किला हैं, जो आहू और काली सिंध नदी के तट पर स्थित है। यह जल दुर्ग खिच्ची चौहान राजपूतों से संबंध रहा है।



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